International Yagya Diwas
यज्ञ दिवस
वर्ष का वह एक दिन जब संसार भर के घरों में एक ही पावन अग्नि प्रज्वलित होती है।
अगला यज्ञ दिवस आरम्भ होने में
०१कारण
17 सितम्बर ही क्यों?
यज्ञ दिवस का जन्म यज्ञ पुत्र के एक सरल आह्वान से हुआ: 17 सितम्बर को हर परिवार हवन करे।
यह तिथि वर्षा ऋतु के अंत में आती है, जब ठहरे पानी में मच्छर और कीट पनपते हैं और मौसमी ज्वर बढ़ते हैं। गुरुदेव की शिक्षा है कि इस समय घरों और गाँवों में फैलता हवन का धुआँ वायु को शुद्ध करता है और परिवार की रक्षा करता है।
पहली बार 2023 में मनाया गया यह दिवस हर वर्ष बढ़ता गया। 2026 में चतुर्थ अंतर्राष्ट्रीय यज्ञ दिवस जयंती देवी मंदिर, जींद में 1008 कुण्डीय महायज्ञ के साथ मनाया गया।
०२संस्करण
अब तक की चार अग्नियाँ
प्रथम
2023
पहली अग्नि
भक्त आह्वान स्वीकार करते हैं और अपने घरों में हवन करते हैं।
द्वितीय
2024
आह्वान का विस्तार
यज्ञ पुत्र परिवार द्वारा घरों और मंदिरों में मनाया गया।
तृतीय
2025
कुरुक्षेत्र के पश्चात्
कुरुक्षेत्र के 1008 कुण्डीय महायज्ञ और गुरुफली के हिमालयी यज्ञ का वर्ष।
चतुर्थ
2026
जींद में 1008 कुण्ड
सायं 4 बजे से वैदिक मन्त्रोच्चार, 7 बजे दिव्य महाआरती, 9 बजे भंडारा — और घरों से लाखों की सहभागिता।
पंचम
2027
आपकी अग्नि
17 सितम्बर 2027। क्या आपके घर में ज्योति जलेगी?
०३विधि
घर पर हवन, क्रमवार
हर परिवार के लिए सरल, हर दिन के लिए पावन। लगभग तीस मिनट का समय रखें।
समय चुनें
सूर्योदय या सूर्यास्त परम्परागत समय है। स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर परिवार सहित पूर्व की ओर मुख करके बैठें।
कुण्ड स्थापित करें
ताम्बे या मिट्टी का छोटा कुण्ड अग्निरोधी सतह पर रखें। पास में जल का कलश, दीपक और पुष्प रखें।
संकल्प लें
हाथ में थोड़ा जल और अक्षत लेकर अपना संकल्प बोलें — किसके लिए और किस हेतु यह यज्ञ कर रहे हैं।
अग्नि प्रज्वलित करें
पतली समिधाओं पर कपूर जलाएँ। धीरे-धीरे लकड़ियाँ बढ़ाएँ, ताकि अग्नि को श्वास मिले।
आहुति दें
हर “स्वाहा” पर दाहिने हाथ की उँगलियों से एक चम्मच घी या चुटकी भर सामग्री अर्पित करें। हर आहुति के बाद “इदं न मम” कहें।
पूर्णाहुति और आरती
पूरे परिवार के साथ अंतिम आहुति दें, आरती करें और प्रसाद बाँटें।
भस्म लौटाएँ
अग्नि शांत होने और भस्म ठंडी होने पर उसे किसी पौधे या वृक्ष की मिट्टी को अर्पित करें।
०४मन्त्र
घर के हवन हेतु मन्त्र
हर पंक्ति बोलें और प्रत्येक “स्वाहा” पर एक आहुति दें।
सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम।प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम॥अग्नये स्वाहा, अग्नये इदं न मम।प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम॥ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।धियो यो नः प्रचोदयात् स्वाहा॥०५सङ्कल्पसंकल्प
अपना यज्ञ दिवस संकल्प बनाएँ
अपना नाम लिखें, संकल्प चुनें, और परिवार के साथ साझा करने हेतु संकल्प-पत्र डाउनलोड करें।